MP News: MP कक्षा छोड़ बाबूगिरी कर रहे शिक्षक, बिना पद चल रही पोस्टिंग

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MP News: मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में एक बार फिर अटैचमेंट का विवाद गरमा गया है। सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शिक्षक गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्त किए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई पर भी सीधा असर पड़ रहा है। और इस तरह से बच्चों के भविष्य के सतह भी खिलवाड़ किया जा रहा है। 

डीईओ ऑफिस में ‘बिना पद’ की नियुक्ति

भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में दो ऐसे मामलों ने सबको चौंका दिया है, जहां शिक्षकों को उन पदों पर अटैच किया गया है, जो स्वीकृत ही नहीं हैं। मीना नागले नामक शिक्षिका को सहायक लेखा अधिकारी बना दिया गया, जबकि डीईओ एनके अहिरवार ने साफ कहा है कि उनके कार्यालय में ऐसा कोई पद ही स्वीकृत नहीं है।

शिक्षक बना सांख्यिकी अधिकारी – नियमों की उड़ रही धज्जियां

दूसरा मामला विकास मिश्रा का है, जो उच्च माध्यमिक शिक्षक होते हुए भी सांख्यिकी अधिकारी जैसे पूर्णत: गैर-शैक्षणिक पद पर अटैच किए गए हैं। इस पद का शिक्षण कार्यों से कोई लेना-देना नहीं और यह शिक्षक कैडर से पूरी तरह असंगत है। सवाल उठता है कि ऐसी तैनातियां किस आधार पर हो रही हैं? और यह कौन कर रहा है। 

शिक्षा छोड़, ऑफिस की फाइलों में उलझे शिक्षक

इन अटैचमेंट्स का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को हो रहा है। जिस समय शिक्षकों को स्कूल में पढ़ा रहे होना चाहिए, वे बाबूगिरी कर रहे हैं। इससे स्कूलों में शिक्षक की कमी बढ़ती है, पढ़ाई प्रभावित होती है और छात्र सीधे तौर पर नुकसान झेलते हैं। यह पूरी प्रक्रिया किसी “जुगाड़ सिस्टम” की तरह काम कर रही है, जहां पद नहीं होने के बावजूद रसूख या दबाव में नियुक्ति दी जा रही है।

डीईओ ने जताई आपत्ति, संचालनालय से मांगा मार्गदर्शन

डीईओ एनके अहिरवार ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने पूछा है कि जब कार्यालय में संबंधित पद स्वीकृत ही नहीं है, तो कार्यभार ग्रहण कैसे कराया जाए? इस पत्र के बाद पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या शिक्षकों का उपयोग अब शिक्षा के बजाए प्रशासनिक खाली पदों को भरने के लिए किया जा रहा है?

सरकार के आदेशों की अनदेखी क्यों?

मध्यप्रदेश सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शिक्षकों को केवल शैक्षणिक कार्यों तक सीमित रखा जाए। मंत्रालय और संचालनालय से इस संबंध में कई निर्देश भी जारी हो चुके हैं। बावजूद इसके, नीचे के स्तर पर इन आदेशों को अनदेखा किया जा रहा है, जिससे न केवल व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि शासन की नीयत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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देखें जनता क्या कहती है

सामान्य जनता और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सब कुछ एक “छिपे हुए तंत्र” की ओर इशारा करता है, जहां प्रभावशाली लोग नियमों को ताक पर रखकर सुविधाजनक पोस्टिंग पा रहे हैं। कई शिक्षक संगठन भी इसे ‘शिक्षा की बर्बादी’ मानते हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं – “जब पढ़ाने वाले ही क्लास से बाहर हैं, तो बच्चे क्या सीखेंगे?”

शिक्षा विभाग में इस तरह की मनमानी नियुक्तियां न सिर्फ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख पर भी बट्टा लगाती हैं। आपको क्या लगता है, क्या अटैचमेंट की यह परंपरा अब बंद होनी चाहिए? नीचे कमेंट करें और अपनी राय साझा करें। और इस तरह की ख़बरों के लिए जुड़े रहें अपना कल न्यूज़ के साथ। 

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