MP News: टीकमगढ़ के आशुतोष त्रिपाठी ने हिमालय में रचा इतिहास, 50 किमी हिल्स मैराथन में हासिल किया पहला स्थान

बुंदेलखंड की 45 डिग्री तक पहुंचने वाली गर्मी में घंटों पसीना बहाने वाले टीकमगढ़ के आशुतोष त्रिपाठी ने जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में अपनी मेहनत का शानदार परिणाम हासिल किया। जुलाई 2026 में आयोजित 50 किलोमीटर हिल्स मैराथन में करीब 1,000 धावकों के बीच पहला स्थान हासिल कर उन्होंने टीकमगढ़ और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया।

21 किलोमीटर से 50 किलोमीटर तक का सफर

आशुतोष त्रिपाठी लंबे समय से पहाड़ी दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। साल 2017 में उन्होंने 21 किलोमीटर की रेस जीती, जिसमें करीब 700 प्रतिभागी शामिल हुए थे। इसके बाद मई 2024 में भी उन्होंने 21 किलोमीटर की प्रतियोगिता में जीत दर्ज की।

अब जुलाई 2026 में उन्होंने दूरी बढ़ाकर 50 किलोमीटर की हिल्स मैराथन में हिस्सा लिया और करीब 1,000 धावकों के बीच पहला स्थान हासिल किया।

बुंदेलखंड की गर्मी में तैयार की जीत की नींव

आशुतोष की तैयारी का सबसे दिलचस्प हिस्सा उनकी ट्रेनिंग रही। टीकमगढ़ में गर्मियों के दौरान तापमान करीब 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बावजूद उन्होंने दोपहर के समय भी दौड़ने का अभ्यास किया।

उनका मानना था कि कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करने से पहाड़ी इलाके में दौड़ते समय शरीर को अलग तापमान और कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी। इसी तैयारी को उन्होंने हिमालय में अपनी कामयाबी का अहम हिस्सा बताया।

सुबह तीन बजे उठकर करते हैं रनिंग

आशुतोष की मेहनत सिर्फ गर्मी में दौड़ने तक सीमित नहीं रही। परिवार के मुताबिक, वह पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से अभ्यास कर रहे हैं और कई बार सुबह करीब तीन बजे उठकर रनिंग के लिए निकल जाते हैं।

कुंडेश्वर धाम से जुड़े उनके पिता पंडित बृजमोहन त्रिपाठी और मां सुनीता त्रिपाठी बेटे की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। परिवार का कहना है कि आशुतोष ने लंबे समय तक अनुशासन और मेहनत के साथ अपनी तैयारी जारी रखी।

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बचपन से था पहाड़ों पर दौड़ने का जुनून

आशुतोष त्रिपाठी टीकमगढ़ के प्रसिद्ध कुंडेश्वर धाम से जुड़े परिवार से आते हैं। बचपन से ही उन्हें एडवेंचर और पहाड़ों में दिलचस्पी रही है।

पहाड़ी मैराथन में लगातार बेहतर प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपने इस शौक को लक्ष्य में बदल दिया। 21 किलोमीटर की रेस में लगातार सफलता के बाद 50 किलोमीटर की चुनौती स्वीकार करना उनके इसी सफर का अगला कदम रहा।

माइनस तापमान में भी कर चुके हैं रेस

आशुतोष के लिए पहाड़ी मैराथन केवल लंबी दूरी की दौड़ नहीं है, बल्कि मौसम और ऊंचाई की चुनौती भी होती है। उनके मुताबिक, उन्होंने माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी 50 किलोमीटर की रेस पूरी की है।

गर्मी में कठिन अभ्यास और पहाड़ी परिस्थितियों में दौड़ने का अनुभव उनके लिए अलग-अलग मौसम में शरीर को तैयार करने में मददगार रहा।

अब 100 और 160 किलोमीटर की दौड़ का लक्ष्य

50 किलोमीटर की रेस में जीत के बाद आशुतोष की नजर अब इससे भी बड़ी चुनौतियों पर है। वह भविष्य में 100 किलोमीटर और 160 किलोमीटर की मैराथन पूरी करना चाहते हैं।

इसके साथ ही उनका लक्ष्य 24 घंटे की अल्ट्रा-रनिंग प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ना और विश्व चैंपियनशिप के लिए अपनी जगह बनाने की दिशा में तैयारी करना है।

टीकमगढ़ के युवा धावक की कहानी देती है बड़ी सीख

आशुतोष त्रिपाठी की कहानी सिर्फ एक मैराथन जीतने की कहानी नहीं है। यह बताती है कि छोटे शहरों और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों से निकलने वाले युवा भी लगातार मेहनत और सही तैयारी के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

45 डिग्री की गर्मी में अभ्यास से लेकर हिमालय की कठिन पहाड़ियों पर 50 किलोमीटर की दौड़ तक का सफर आशुतोष के धैर्य और लंबे समय की तैयारी को दिखाता है। अब 100 और 160 किलोमीटर की चुनौतियों के साथ उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने पर है।

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  • Founder & CEO Uday Patel

    उदय पटेल ApnaKal के Founder & CEO हैं। वे मध्य प्रदेश समाचार, सरकारी योजनाओं और जनहित से जुड़े विषयों पर लेख लिखते हैं।

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