MP News: मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जुलाई महीने में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहली रैंक हासिल की है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में 36 योजनाओं के समन्वय से कृषि एवं मिलेट उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। डिंडौरी में 34,700 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो-कुटकी की खेती की जा रही है और 14 एफपीओ के माध्यम से 52,282 किसान परिवार योजना से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में डिंडौरी ने हासिल की पहली रैंक
मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश कृषि विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार जुलाई महीने में 36 योजनाओं के समन्वय के आधार पर डिंडौरी ने प्रथम रैंक प्राप्त की है।
जिले में कृषि से जुड़ी अलग-अलग योजनाओं को आपस में जोड़कर किसानों तक उनका लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी समन्वित प्रयास के चलते डिंडौरी ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में जुलाई में बेहतर प्रदर्शन किया है।
36 योजनाओं के समन्वय से मिला बेहतर परिणाम
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत डिंडौरी में 36 योजनाओं के समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में किसानों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। किसी किसान को खेती के लिए तकनीकी सहायता की जरूरत होती है तो किसी को बाजार, उत्पादन या संगठन से जुड़ने की आवश्यकता होती है। ऐसे में अलग-अलग योजनाओं को समन्वित तरीके से लागू करने से किसानों तक विभिन्न सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
डिंडौरी की जुलाई की उपलब्धि को इसी समन्वित प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है।
डिंडौरी में कृषि और मिलेट उत्पादन को मिल रहा बढ़ावा
डिंडौरी में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि एवं मिलेट उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मिलेट यानी मोटे अनाजों में कोदो और कुटकी जैसी फसलें डिंडौरी के कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। जिले में इन फसलों की खेती को बढ़ावा देने से स्थानीय कृषि उत्पादन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
कृषि विभाग की ओर से जारी जानकारी में भी डिंडौरी की उपलब्धि को कृषि एवं मिलेट उत्पादन में बढ़ोतरी से जोड़ा गया है।
34,700 हेक्टेयर में हो रही कोदो-कुटकी की खेती
डिंडौरी की इस उपलब्धि में कोदो-कुटकी की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देती है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले में 34,700 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो-कुटकी की खेती की जा रही है।
कोदो और कुटकी डिंडौरी क्षेत्र की पारंपरिक फसलों में शामिल हैं। इन फसलों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय किसानों को अपनी पारंपरिक कृषि उपज को बड़े स्तर पर उत्पादन करने का अवसर मिल रहा है।
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52,282 किसान परिवार योजना से जुड़े
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत डिंडौरी में बड़ी संख्या में किसान परिवारों को जोड़ा गया है।
कृषि विभाग के अनुसार 52,282 किसान परिवार इस पहल से जुड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में किसान परिवारों का जुड़ना जिले में योजना के व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन को दर्शाता है।
किसानों को योजनाओं और कृषि से जुड़ी सुविधाओं से जोड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।
14 FPO के माध्यम से किसानों को जोड़ा गया
डिंडौरी में किसानों को संगठित करने और कृषि गतिविधियों को मजबूत बनाने में FPO यानी Farmer Producer Organisation की भी भूमिका है।
कृषि विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार जिले में 14 FPO के माध्यम से 52,282 किसान परिवार जुड़े हैं।
किसान उत्पादक संगठन किसानों को सामूहिक रूप से कृषि गतिविधियों से जोड़ने का माध्यम प्रदान करते हैं। इससे किसानों को अपनी उपज के उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
कोदो-कुटकी को मिली राष्ट्रीय पहचान
डिंडौरी की कोदो-कुटकी आधारित कृषि को एक और उपलब्धि मिली है। साझा की गई जानकारी के अनुसार कोदो-कुटकी उत्पादों को GI टैग से राष्ट्रीय पहचान मिली है।
GI टैग किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े उत्पाद की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है। डिंडौरी की कोदो-कुटकी से जुड़े उत्पादों को GI पहचान मिलने से इन स्थानीय कृषि उत्पादों की विशिष्टता को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने का रास्ता मजबूत हुआ है।
इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादित कोदो-कुटकी से जुड़े उत्पादों की पहचान और बाजार की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
मिलेट उत्पादन से किसानों को क्या फायदा?
मिलेट आधारित खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों के लिए पारंपरिक फसलों के साथ वैकल्पिक कृषि उत्पादन का अवसर तैयार हो सकता है।
डिंडौरी में बड़े क्षेत्र में कोदो-कुटकी की खेती पहले से हो रही है। ऐसे में इन फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार से बेहतर तरीके से जुड़ने पर स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
डिंडौरी की कृषि व्यवस्था में FPO की भूमिका
किसानों को व्यक्तिगत रूप से बाजार और कृषि गतिविधियों से जोड़ने के बजाय किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से सामूहिक रूप से जोड़ने की व्यवस्था किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।
डिंडौरी में 14 FPO के माध्यम से बड़ी संख्या में किसान परिवारों को जोड़ा गया है। इससे किसानों को संगठित होकर अपनी कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
आने वाले समय में FPO के माध्यम से स्थानीय कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता और किसानों से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है।
डिंडौरी में योजना के अंतर्गत कई योजनाओं के समन्वय के साथ कृषि और मिलेट उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जुलाई में पहली रैंक हासिल करना जिले में इन प्रयासों के बेहतर परिणाम के तौर पर सामने आया है।
डिंडौरी के किसानों के लिए आगे क्या उम्मीद?
डिंडौरी में कोदो-कुटकी की खेती बड़े क्षेत्र में होने और हजारों किसान परिवारों के FPO से जुड़ने के बाद जिले में मिलेट आधारित कृषि को और आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
अगर उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव मजबूत होता है तो स्थानीय किसानों को अपनी कृषि उपज के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
फिलहाल कृषि विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी डिंडौरी की जुलाई की उपलब्धि और योजना के तहत किए जा रहे प्रयासों पर केंद्रित है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में डिंडौरी ने जुलाई 2026 में पहली रैंक हासिल कर जिले की कृषि गतिविधियों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। कृषि विभाग के अनुसार 36 योजनाओं के समन्वय से जिले में कृषि एवं मिलेट उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिंडौरी में 34,700 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो-कुटकी की खेती, 52,282 किसान परिवारों का 14 FPO से जुड़ाव और कोदो-कुटकी उत्पादों को मिली GI पहचान इस उपलब्धि के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं।
मिलेट उत्पादन और किसान संगठनों को बढ़ावा मिलने से डिंडौरी के स्थानीय कृषि उत्पादों को आगे बाजार से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। आने वाले समय में इन प्रयासों का वास्तविक लाभ किसानों की आय, बाजार पहुंच और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।