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CM मोहन को खून से लिखा पत्र: लाड़ली बहनों का दर्द छलका, MP में वेटिंग शिक्षकों का फूटा ग़ुस्सा

CM मोहन को खून से लिखा पत्र: मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती वर्ग-1वेटिंग में बैठीं लाड़ली बहनों का सब्र अब टूट रहा है। मध्य प्रदेश की महिला शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को याद दिलाया है और लिखा की “हम लाड़ली हैं, लेकिन सिर्फ प्रचार के लिए नहीं, अधिकार के लिए भी हैं।” शिक्षक भर्ती वर्ग-1 की वेटिंग लिस्ट में नाम होने के बावजूद हज़ारों महिलाओं को अब तक नियुक्ति नहीं मिली, और अब मामला बिगड़ता जा रहा है।

CM मोहन को खून से लिखा पत्र

2023 की शिक्षक भर्ती वर्ग-1 के बाद सैकड़ों अभ्यर्थी वेटिंग लिस्ट में हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं, जिन्होंने हाल ही में कुछ ऐसा किया जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। शिक्षक भर्ती वर्ग-1 वेटिंग लिस्ट की बहनों ने इंजेक्शन से खून निकालकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा और यह पत्र सीधा, भावनात्मक और सवालों से भरा हुआ था।

बहनों ने पत्र में लिखा कि मोहन भैया, लाड़ली बहनों की पीड़ा समझिए। हमने मेहनत से परीक्षा पास की, लेकिन अब तक नौकरी नहीं मिली।

हलाकि यह कोई पहली बार नहीं है जब वेटिंग अभ्यर्थियों ने विरोध किया हो, लेकिन इस बार का तरीका ऐसा है जो सरकार की संवेदनशीलता को सीधा चुनौती देता है।

शिक्षक भर्ती में 2901 पद खाली फिर भी नहीं मिली जगह

शिक्षक भर्ती वर्ग-1, 2023 में कुल 8720 पद स्वीकृत थे। इनमें से केवल 5053 पर ही नियुक्ति हुई, जबकि 2901 पद अब तक रिक्त हैं। शिक्षक भर्ती वर्ग-1 के अभ्यर्थियों का कहना है कि जब चयन सूची में नाम है, तो फिर नियुक्ति क्यों नहीं?

इतना ही नहीं दिसंबर 2024 में सरकार ने शिक्षा विभाग में 48,223 और जनजातीय कार्य विभाग में 10,501 नए पद स्वीकृत किए हैं। तो सवाल उठता है जब नए पद भर सकते हैं, तो पुराने योग्य उम्मीदवारों को क्यों छोड़ा जा रहा है?

वेटिंग वालों का इतिहास और सरकार की चुप्पी

वेटिंग शिक्षक संघ के अध्यक्ष निलेश गौतम ने बताया कि 2011 और 2018 की भर्तियों में द्वितीय काउंसलिंग से योग्य अभ्यर्थियों को नौकरी दी गई थी। लेकिन इस बार 2023 में ये परंपरा अचानक तोड़ दी गई, जिससे अब सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी बेरोजगार हैं।

वंदना पांडे, नीरज त्रिवेदी और देशपाल पालीवाल जैसे कई वेटिंग अभ्यर्थी कहते हैं कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं है, यह गरीब बच्चों की शिक्षा के अधिकार का भी सवाल है। जब योग्य शिक्षक नियुक्त नहीं होंगे, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और वव्यस्था  कैसे सुधरेगी?

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वेटिंग महिला अभ्यर्थियों ने एक और बात मुख्यमंत्री को याद दिलाई कि पिछली राखी पर आपने कहा था कि वर्ग-1 वेटिंग वाली आपकी लाड़ली बहनों का ख्याल रखना। अब वही बहनें पूछ रही हैं कि क्या वह वादा सिर्फ एक त्योहार तक सीमित था।  आगे इन्होने कहा कि हमें सहायता नहीं, अधिकार चाहिए — ये एक लाइन अब सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड करने लगी है।

मध्यप्रदेश की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, अब वेटिंग शिक्षक अभ्यर्थियों की आवाज़ गूंज रही है। उनकी मांग सीधी है कि रिक्त पदों पर तत्काल द्वितीय काउंसलिंग की जाए। मोहन सरकार ने नए पदों की स्वीकृति देकर भविष्य का रास्ता खोला है, लेकिन अगर बीते हुए मेहनती युवाओं को नजरअंदाज़ किया गया, तो ये एक आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

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