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MP के 18 आयुर्वेद कॉलेजों को मिली बड़ी मान्यता, नीट के ज़रिए होंगे अब दाखिले

मध्य प्रदेश के आयुर्वेद छात्रों के लिए बड़ी राहत और गर्व की खबर सामने आई है। अब राज्य के 18 आयुर्वेद कॉलेजों को केंद्र सरकार से औपचारिक मान्यता मिल गई है। इससे न केवल छात्रों के भविष्य को नई दिशा मिलेगी, बल्कि आयुर्वेद शिक्षा में एमपी अब राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।

MP के 18 आयुर्वेद कॉलेजों को मिली मान्यता

केंद्रीय आयुष मंत्रालय और नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) ने हाल ही में मध्य प्रदेश के 18 आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों को औपचारिक मान्यता दे दी है। इनमें भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख शहरों के 7 सरकारी और 11 निजी कॉलेज शामिल हैं।

आयुर्वेद कॉलेजों को मान्यता देने के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा मान्यता मिलने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। देश में कुल 598 कॉलेजों में से अब तक 482 कॉलेजों को ही मान्यता मिली है, जिनमें मध्य प्रदेश के ये 18 कॉलेज भी शामिल हैं।

नीट के ज़रिए होगा अब एडमिशन

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने बताया कि अब इन कॉलेजों में दाखिला NEET 2025-26 के परिणामों के आधार पर होगा। यानी MBBS की तरह अब BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) में भी कड़ा कॉम्पिटिशन और मेरिट पर आधारित दाखिले की व्यवस्था लागू होगी। एमपी के कॉलेजों में लगभग 3,000 UG सीटें हैं, जबकि पूरे देश में यह संख्या 42,000 से अधिक हो चुकी है।

इस बार भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज को 75 UG और 74 PG सीटें मिली हैं, जो कि मध्य प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके अलावा भोपाल के निजी कॉलेजों में शामिल है – स्कूल ऑफ आयुर्वेद साइंस, सरदार अजीत सिंह स्मृति आयुर्वेद कॉलेज, रामकृष्ण आयुर्वेद कॉलेज और मानसरोवर आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज। इन सभी को 100-100 BAMS सीटें मिली हैं। इससे यह साफ है कि राजधानी भोपाल, आयुर्वेद शिक्षा का नया केंद्र बनकर उभर रही है।

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16 अन्य कॉलेज को मान्यता का इंतज़ार

जहां एक तरफ 18 कॉलेजों को मान्यता मिल चुकी है, वहीं मध्य प्रदेश के 16 अन्य कॉलेज और देशभर के कई संस्थानों को अब भी फैसले का इंतज़ार है। एसोसिएशन ने सरकार और आयोग से अपील की है कि बाकी कॉलेजों के लिए भी जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि छात्र असमंजस में न रहें।

मेरे अनुसार, सरकार द्वारा दी गई यह मान्यता निश्चित रूप से आयुर्वेद शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल छात्रों को करियर की स्पष्टता मिलेगी, बल्कि इंडियन मेडिकल सिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। लेकिन एक पहलू यह भी है कि अब कॉम्पिटिशन और मेरिट की कसौटी पर छात्रों को खरा उतरना होगा। नीट के ज़रिए दाखिला जहां पारदर्शिता लाएगा, वहीं मेहनत और तैयारी का स्तर भी बढ़ेगा।

क्या आप मानते हैं कि आयुर्वेद को अब मेडिकल शिक्षा के मुख्यधारा में जगह मिल रही है? क्या ये बदलाव छात्रों और समाज दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा? नीचे कमेंट करें और इस मुद्दे पर अपनी राय ज़रूर साझा करें। और ऐसी ख़बरों के लिए अपना कल के साथ जुड़े रहें। 

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