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MP News: GMT की समय गड़ना गलत, अब उज्जैन तय करेगा विश्व का समय

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खगोल विज्ञान की दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखने वाले उज्जैन जिले के डोंगला क्षेत्र में एक क्रांतिकारी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि “डोंगला मेरिडियन टाइम (DMT) को दुनिया के ग्रीनविच मेरिडियन टाइम (GMT) के समकक्ष विकसित किया जाएगा।” यह घोषणा उज्जैन में हुए तारामंडल के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान की गई, जो भारतीय खगोलशास्त्र और काल गणना की परंपरा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। और यही वजह है की यह कहा जा रहा है की GMT की समय गड़ना गलत, अब उज्जैन तय करेगा विश्व का समय। 

काल गणना का नया अंतरराष्ट्रीय केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने कहा कि ‘काल’ का मतलब है समय, और ‘काल की नगरी’ यानी उज्जैन, जो सृष्टि की समय-रेखा का केंद्र रहा है। भारत हजारों वर्षों से समय की गणना में पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श रहा है और उज्जैन इसकी आधारशिला है।

सीएम मोहन यादव जी ने बताया कि समय की गणना में प्रयुक्त मेरिडियन लाइन (प्रधान समय रेखा), जो कभी उज्जैन से होकर गुजरती थी, अब खिसककर डोंगला पहुंच चुकी है। यही कारण है कि डोंगला को ‘डोंगला मेरिडियन टाइम’ (DMT) के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की दिशा में कार्य शुरू किया जा रहा है।

वराहमिहिर वेधशाला का आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीयकरण

मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने ऐलान किया कि डोंगला में स्थित वराहमिहिर वेधशाला को आधुनिकीकरण कर अंतरराष्ट्रीय खगोलीय रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा। यह वेधशाला खगोल विज्ञान के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसंधान और अध्ययन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी।

इस कार्यशाला के दौरान देश के प्रमुख वैज्ञानिक और विद्वान भी उपस्थित थे, जिनमें शामिल रहे डॉ. शिवकुमार शर्मा जो कि राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं विज्ञान भारती है। इसके साथ ही डॉ. अरविंद रानाडे – निदेशक, राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान, प्रो. जीएस मूर्ति – राष्ट्रीय संयोजक, भारतीय ज्ञान प्रणाली, डॉ. सौरभ शर्मा और अनिल कोठारी जो महानिदेशक, मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद है। 

खगोल शास्त्र में भारत की प्राचीन समझ को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने बताया कि उज्जैन में स्थित शंकु यंत्र आज भी सूर्य की चाल को दर्शाने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि “एक दोलन (Pendulum Motion) को अपनी स्थिति में लौटने में लगभग 27,500 वर्ष लगते हैं। काल गणना की इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का केंद्र डोंगला बनता जा रहा है।”

उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे वे नारायणा और डोंगला के बीच की सीध में स्थित बिंदु की खोज में यहां आए थे। आज GPS के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि नारायणा और डोंगला एक सीध में हैं, जो इस क्षेत्र की वैज्ञानिक महत्ता को दर्शाता है।

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DMT को मिलेगा केंद्र सरकार का समर्थन

मोहन यादव जी ने बताया कि डोंगला मेरिडियन टाइम (DMT) को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग प्राप्त किया जाएगा। उनका सपना है कि दुनिया के वैज्ञानिक यहां रिसर्च करें और भारतीय खगोलशास्त्र की समझ को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाए।

डोंगला और उज्जैन की ऐतिहासिक और खगोलिक महत्ता को देखते हुए सीएम मोहन यादव जी ने की यह घोषणा निश्चित रूप से भारत को पुनः खगोल विज्ञान और समय की गणना में वैश्विक नेतृत्व दिला सकती है। डोंगला मेरिडियन टाइम (DMT) और वराहमिहिर वेधशाला भविष्य में विज्ञान, शोध और संस्कृति के संगम के रूप में उभरने जा रहे हैं।

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