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मन की बात में मध्य प्रदेश के बालाघाट की बेटी का जिक्र, सूमा उइके की मेहनत पर बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बालाघाट जिले की सूमा उइके की सराहना कर पूरे मध्य प्रदेश को गर्व से भर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने पीएम मोदी का आभार जताते हुए इसे मध्य प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बताया। एक सामान्य महिला से आत्मनिर्भर उद्यमी बनी सूमा की यह कहानी अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। और हमे भी सूमा की इस कहानी से प्रेरणा मिलती है। 

पीएम मोदी की ‘मन की बात’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बालाघाट जिले के ग्राम भजियापार की सूमा उइके की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कैसे एक साधारण महिला ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मशरूम की खेती, पशुपालन, थर्मल थेरेपी और ‘दीदी कैंटीन’ जैसे कार्यों से खुद की दुनिया बदल दी।

सूमा उइके की मेहनत और यह कहानी हमारे लिए एक प्रेरणा है और यह सिर्फ सूमा की जीत नहीं है, बल्कि उन लाखों महिलाओं की भी जीत है जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। और हमे इससे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी का माना आभार

सीएम डॉ. मोहन यादव जी ने विजयनगर स्थित लालघाटी क्षेत्र में ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुना और पीएम मोदी के इस ज़िक्र को मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात बताया। उन्होंने आगे कहा कि, “प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के जीवन में बदलाव लाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।”

सूमा उइके के संघर्ष से सफलता की कहानी

कटंगी ब्लॉक के छोटे से गांव भजियापार की सूमा उइके की कहानी आज लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने पहले मशरूम उत्पादन सीखा, फिर पशुपालन में ट्रेनिंग ली। जब आमदनी बढ़ी तो थर्मल थेरेपी और दीदी कैंटीन की शुरुआत की। आज वह न सिर्फ अपने घर का खर्च चला रही हैं, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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सूमा महिला सशक्तिकरण का नया चेहरा

सूमा की सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। सरकार द्वारा स्व-सहायता समूह और इन तमाम योजनाओं द्वारा ऐसे हजारों ग्रामीण महिला उद्यमियों को नई पहचान मिलेगी। सरकारी योजनाएं अगर ज़मीनी स्तर तक पहुंचें और महिलाओं को सही मार्गदर्शन मिले तो बदलाव संभव है। और मध्य प्रदेश की  सूमा इसका जीता जगता उदाहरण हैं।

लोगों ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बह सूमा की सराहना की है। आज जब सूमा दीदी को पीएम मोदी ने सराहा, तो लगा सच्ची मेहनत को सम्मान मिल गया। कई युवाओं और महिलाओं ने इसे अपने लिए एक नई उम्मीद बताया। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि सरकार को अब ज़्यादा महिलाओं तक ट्रेनिंग और आर्थिक मदद पहुंचानी चाहिए, ताकि सूमा जैसे और भी महिलाएं उभरें।

सूमा उइके की कहानी बताती है कि अगर नीयत साफ हो और सरकार की योजनाएं सही हाथों तक पहुंचें, तो बदलाव असंभव नहीं है। प्रधानमंत्री का यह ज़िक्र न केवल एक महिला की तारीफ है, बल्कि एक पूरे ग्रामीण भारत की ताकत को सलाम है। अब आप बताएं आपको क्या लगता है? क्या ये बदलाव स्थायी बन सकते हैं? क्या और भी महिलाएं इस राह पर चल सकती हैं? नीचे कमेंट करके अपनी राय बताएं। और ऐसी ख़बरों के लिए अपना कल के साथ जुड़े रहें।

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