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MP जल जीवन मिशन घोटाला क्या है? संपतिया उइके पर जांच के आदेश

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत हज़ारों करोड़ रुपये पानी पहुंचाने के नाम पर खर्च हुए, लेकिन असल में ये पैसा कहां गया? अब इस पर सवाल उठने लगे हैं। 1000 करोड़ से ज्यादा के इस कथित घोटाले की जांच शुरू हो चुकी है। और इसमें महिला मंत्री संपतिया उइके का नाम सामने आना राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है।

क्या यह सिर्फ एक अफसरशाही की लापरवाही है या राजनीति से जुड़ा बड़ा भ्रष्टाचार? और यह MP जल जीवन मिशन घोटाला आखिर क्या है आज के इस आर्टिकल में सब कुछ जानने वाले हैं।

MP जल जीवन मिशन घोटाला क्या है?

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसके तहत हर ग्रामीण घर को नल के जरिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। और मध्य प्रदेश में इस योजना पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।

लेकिन हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि इस योजना के तहत कई ठेकेदारों को बिना वेरिफिकेशन के भुगतान कर दिए गए। कुछ जगहों पर पाइपलाइन डाली ही नहीं गई, और कहीं पानी पहुंचने का कोई इंतजाम नहीं था फिर भी लाखों-करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। और इस तरह यह योजना मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन घोटाला का रूप ले लिया। 

इस तरह सामने आया घोटाला

जैसे-जैसे जल जीवन मिशन योजना की प्रगति रिपोर्ट्स और फील्ड निरीक्षण की असल तस्वीरें सामने आईं, वैसे-वैसे घोटाले की परतें खुलने लगीं। CAG (कैग) रिपोर्ट और कुछ RTI जवाबों में साफ़ हुआ कि ठेकेदारों को बिना काम पूरा किए पेमेंट कर दिए गए।

कुछ अधिकारियों ने बंद गांवों या कम जनसंख्या वाले इलाकों में भी ज़रूरत से ज्यादा पाइपलाइन दिखाकर बिल पास कराए। यहां तक कि कई जगहों पर उपयोग हुए पाइप्स की क्वालिटी भी घटिया पाई गई।

जल जीवन मिशन घोटाले में संपतिया उइके का नाम

MP जल जीवन मिशन घोटाला का यह मामला तब और भी ज्यादा गरमाया जब इस घोटाले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की मंत्री संपतिया उइके का नाम सामने आया। इस घोटाले की जांच में कुछ दस्तावेज़ ऐसे मिले जिनमें संपतिया उइके के रिश्तेदारों की कंपनियों को ठेके दिए जाने का संदेह जताया गया।

बताया जा रहा है कि इन कंपनियों को काम मिलने से पहले ही पेमेंट के आदेश तैयार हो गए थे। यह भी शक है कि कई निविदाएं केवल औपचारिकता निभाने के लिए खोली गईं, जबकि पहले से तय ठेकेदारों को काम सौंप दिया गया था। हालांकि संपतिया उइके की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जांच एजेंसियों की नजर अब उनकी भूमिका और संबंधों पर है।

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राजनीति में मचा भूचाल

भ्रष्टाचार के इस बड़े आरोप ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल ला दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला मुमकिन नहीं था। कांग्रेस नेताओं ने जांच की CBI से कराने की मांग की है। ग्रामीण जनता खास तौर पर मंडला, डिंडोरी जिले के लोग इस घोटाले से सबसे ज्यादा आहत है। जिन इलाकों में अभी तक पानी पहुंचना चाहिए था, वहां लोग आज भी हैंडपंप और कुएं के भरोसे हैं।

मेरे अनुसार जांच अभी शुरुआती दौर में है। लेकिन अगर दस्तावेज़ और गवाह पक्के साबित हुए, तो यह घोटाला देश के सबसे बड़े घोटालों में शामिल हो सकता है। संपतिया उइके और अन्य जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर आने वाले दिन बेहद अहम होंगे। लेकिन अभी से किसी भी मंत्री या किसी व्यक्ति को दोषी बोलना गलत हो जायगा इस लिए पूरी जांच का इंतज़ार करना सभी के लिए जरुरी है। 

क्या आपको लगता है कि इस तरह के घोटालों में नेताओं को भी सज़ा मिलनी चाहिए? क्या आपको लगता है कि जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं पर और निगरानी होनी चाहिए? नीचे कमेंट करें और इस घोटाले पर अपनी आवाज़ उठाएं। और ऐसी ख़बरों के लिए अपना कल के साथ जुड़े रहें। 

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